सोमवार को लोक सभा में आपराधि क क़ानून संशोधन विधेयक पर चर्चा के बाद उसे पास कर दिया गया है. आपराधिक क़ानून में इस बदलाव के बाद 12 साल से कम उ म्र की बच्चियों के साथ ब लात्कार के मामलों में दोषियों को मृत्युदंड तक की सज़ा सुनाई जा सकती है. इससे पहले साल 2012 में दिल्ली में एक चलती बस पर कॉ लेज की छात्रा 'निर्भया' के बलात्कार के बाद अगले साल क़ानून में संशोधन कर बलात्कार के लिए अधिकतम मौत की सज़ा का प्रावधान लाया गया था. पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान के बाद भारत, बलात्कार के लिए मौत की सज़ा तय करनेवाला चौथा दक्षिण-एशियाई देश है. पर क्या ये प्रावधान बलात्कार के मामले कम करने में कारगर है, इसपर एक राय नहीं है.लेकिन इसके प्रावधानों को औरतों और बच्चों के ही ख़िलाफ़ माना गया, मसलन बलात्कार साबित करने के लिए सबूत के तौर पर चार मर्द चश्मदीद की ज़रूरत थी. वर्ना इसे 'अडल्ट्री' माना जाता और उस के लिए औरत को भी सज़ा दी जाती. आख़िरका र 2006 में 'हुदूद ऑर्डिने न्स' को संशोधित किया गया और नया क़ानून 'प्रोटेक्शन ऑफ़ वुमेन (क्रिमिनल लॉज़ अमेंडमेंट) ऐ...